युद्ध औरी शांति कबों चले ना दुनु एक साथ।
पीठ पीछे करे बुराई औरी मिलावे कपटी हाथ।
क्षमा शांति औरी ज्ञान शोभेला वीर बलवाना।
मुरख मूढ़ औरी अज्ञानी व्यर्थ बा समझाना।
वैशाख पूर्णिमा विष्णु लिहले कच्छप अवतार।
मिलल ज्ञान बुद्ध बोध गया वृक्ष बोधी बिहार।
बा नौवा अवतार विष्णु महात्मा बुद्ध के जाना।
विश्व शांति ज्ञान ध्यान प्रमाण सब जग पहीचाना।
आतंक अत्याचार हत्या काल फिर बुद्ध आवा।
ले के शरण आपन बुद्धम शरणं गच्छामि बुलावा।
भारत भूमि हवे देव भूमि बा स्वर्ग लोक से बढ़के।
बुद्ध कृष्ण राम परशुराम फिर आवेके बा अबके।
कुविचार व्यभिचार अत्याचार बढ़ल बा सब ओर।
छोड़ के स्वर्ग आवा बुद्ध करा धरती जन विभोर।
भईल बुद्धि भ्रष्ट पथ भ्रष्ट नष्ट बा भईल संस्कार।
जाप करी ऊं नमो बुद्धायै बढ़ावा अब सुविचार।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड Mob.9955509286
