vivratidarpan.com – डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’ की ‘बाल वाटिका’ बाल-साहित्य के क्षेत्र में एक सरस, स्नेहिल और संस्कारप्रद कृति के रूप में उभरती है। यह पुस्तक न केवल बच्चों के मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि उन्हें भाषा–संवेदन, नैतिक मूल्यों और कल्पनाशीलता की समृद्ध दुनिया से भी परिचित कराती है। 68 पृष्ठों में 60 कवितायें लिए, दादी पोती के मधुर संबंध को दर्शाता आकर्षक आवरण पृष्ठ, लोकरंजन प्रकाशन प्रयागराज का अनमोल प्रकाशन है|
डॉ. पाण्डेय की भाषा सरल, प्रवाहमयी और बाल-रुचि के अत्यंत अनुकूल है। पुस्तक में प्रयुक्त शब्दावली सहज है, जिससे छोटे बच्चे भी बिना कठिनाई के सामग्री को समझ सकते हैं। लेखिका कहीं भी बोझिल उपदेशात्मक स्वर नहीं अपनातीं, यह इसकी प्रमुख विशेषता है।
बाल वाटिका में संकलित रचनाएँ (कहानियाँ / कविताएँ / गीत—जो भी पुस्तक में शामिल हों) बच्चों की कल्पना, संवेदना और जिज्ञासा को जगाने वाली हैं।
प्रमुख विषयों में – प्रकृति के प्रति प्रेम, पशु–पक्षियों से आत्मीयता, परिवार एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी, नैतिक मूल्य और खेल–मनोरंजन और हास्य जैसे विषयों को अत्यंत सहजता से छोटी छोटी कविताओं में चित्रों के साथ पिरोया गया है।
लेखिका बाल–मनोविज्ञान की अच्छी जानकार प्रतीत होती हैं। पात्र बच्चों से संवाद स्थापित करते हैं, घटनाएँ उनके दैनिक जीवन के आसपास घूमती हैं, उपदेश के स्थान पर प्रेरणा और अनुभव पर बल है| यह संतुलन बाल वाटिका को प्रभावी और बच्चों के अनुकूल बनाता है।
बाल वाटिका सांस्कृतिक संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों को सहज रूप में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक प्राथमिक शिक्षा में और माता–पिता द्वारा घर पर बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
बाल वाटिका डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’ द्वारा रचित एक सरल, मनोरंजक और मूल्यपरक बाल-साहित्य कृति है। रचनाएँ प्रकृति, पशु–पक्षी, परिवार और नैतिक मूल्यों को हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत करती हैं। डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’ की ‘बाल वाटिका’ बाल–साहित्य की उस श्रेणी में रखी जा सकती है, जो मनोरंजन के साथ शिक्षण को भी सहजता से समाहित करती है। सरल भाषा, प्यारी कविताएँ और संस्कारमूलक संदेश इस पुस्तक को बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों, सभी के लिए उपयोगी बनाते हैं।
पुस्तक का नाम – ‘बाल वाटिका’
पृष्ठ – 68
रचनायें – 60 कवितायें
प्रकाशक – लोक रंजन प्रकाशन, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
लेखिका – डॉ पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’
समीक्षक – संजीव कुमार भटनागर, लखनऊ उत्तर प्रदेश
