हाल अपना जता दिया होता,
आह दिलसे मिटा दिया होता।
प्यार में दुश्मनी नहीं अच्छी,
नफरतों को दबा दिया होता।
रात-दिन प्यार में तड़प कैसी,
कर इशारा बता दिया होता।
प्यार में दिल निसार हो जाये,
बेकरारी छुपा दिया होता।
धूप या छांव जिंदगी जानों,
दोस्ती को हवा दिया होता।
बाँह खोले बहार झूमेगी,
मुहब्बत का पता दिया होता।
धड़कनें बोलतीं सुनों ना ‘अनि’
राह सबको दिखा दिया होता।
– अनिरुद्ध कुमार सिंह
धनबाद, झारखंड
