बंधन – अनिरुद्ध कुमार

 

सुंदर बंधन प्रेम का, जीवन का आधार।

सबकें मन में प्रेम से, सुखमय हो संसार।।

 

बंधन से दुनिया चलें, यह दुनिया का सार।

धरती सूरज चाँद से, रातो-दिन चमकार।।

 

बंधन में तन-मन रहें, सुखदायक व्योहार।

बाधाओं से जा भिड़ें, होती जय जयकार।।

 

बंधन पर यह भूप है, वायु नदीं जल धार।

सागर झरना झील से, जीवन हो गुलजार।।

 

बंधन में रहना भला, बंधन हीं करतार।

प्रभु से बंधन बांध के, करलें बेड़ा पार।।

– अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड

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