सच्चे दिल से उनको बहुत प्यार किया, फिर भी वो हमारे हो नहीं सके।
सच्चे दिल से उनका किया हमने आदर, फिर भी वो दोस्त हो नहीं सके।।
सच्चे दिल से उनको बहुत प्यार——————–।।
सोचा था हमने कि, होगा उनका दिल सफ़ा।
किसी दिन हमसे होंगे, वो भी सच वफ़ा।।
अपने लहू से किया, रोशन नाम उनका हमने।
फिर भी हमको आँखों में, वो कभी बसा नहीं सके।।
सच्चे दिल से उनको बहुत प्यार———————।।
जब आँसू उनके गिरे, हमने खून अपना बहाया।
उनके हर दर्द को हमने, अपना दर्द बनाया।।
आबाद किये उनके ख्वाब हमने, बर्बाद खुद को करकै।
फिर भी हमारे हमदर्द, वो कभी हो नहीं सके।।
सच्चे दिल से उनको बहुत प्यार———————।।
हम एक मुफ़लिस है इसलिए, उनको हम नहीं पसंद।
इसलिए करते नहीं कद्र हमारी, वो बेखबर बेदर्द।।
किया गुलजार चमन उनका, खुद को बदनाम हमने करकै।
फिर भी सच्चे दिल से हमको प्यार, वो दे नहीं सके।।
सच्चे दिल से उनको बहुत प्यार——————-।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)
