प्रिया हो – प्रकाश राय

 

पुष्पों से पुष्पित पुष्पा हो,

पल्लवित होकर प्रिया हो।

 

तन एवं मन से यौवन हो,

कर्म महान,व्यवहार मधुर हो।

 

जन-जन की चेतना हो,

आराध्य की आराधना हो।

 

अपने स्नेही पिता की लाडली हो,

अपने स्वामी की पतिव्रता नारी हो।

 

स्नेहिल भाव, हंस मुख मुस्कान,

दिल में न थोड़ा-सा अभिमान।

 

दूर-दूर जाकर भ्रमण किया करती,

दीन-दुखियों से सुबह-शाम मिला करती।

 

सबका हाल-समाचार पूछा करती,

सुख-दुख में सदैव साथ दिया करती।

 

एक नारी के हैं दो रूप,

सिद्धिदात्री व चंडी रूप।

 

सिद्धिदात्री रूप में प्रेम फैलाती,

चंडी रूप में असुरों को ललकारती।

 

समस्तीपुर की हैं महिला जिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष,

निषाद राज व वीआईपी राजनीतिक दलों के संग।

 

कण-कण में हैं विश्वास,

रोम-रोम में हैं एक आस।

 

कहतीं हैं अबकी बार हमारी सरकार,

बहुमत से बनेगी पुनः एक नयी सरकार।

(सुश्री पुष्पा को समर्पित मेरी रचना)

– प्रकाश राय, समस्तीपुर, बिहार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *