( 1 ) धरा हमारी
है स्वर्ग सी सुंदर,
इसे सहेजें !!
( 2 ) माता धरती
पुत्र हम इसके,
स्नेह दिखाएं !!
( 3 ) श्रृंगार करें
प्रिय वसुंधरा का,
वृक्ष लगाएं !!
( 4 ) नित्य उठते
माँगते क्षमा माफ़ी,
नमन करें !!
( 5 ) पंच तत्वों का
संतुलन बनाते,
धरा बचाएं !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
