पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती

दिल लेके दिल नहीं दिया तुमको हम बेईमान कहेंगे।

कद्र नहीं नाजुक दिल नहीं तुमको हम कद्रदान कहेंगे।

 

अपनी मर्जी से आना जाना आंखों को प्यासा छोड़कर।

तड़पता देख मुस्कुराना तेरे हुस्न का हम गुमान कहेंगे।

 

बिखर रही है खुशबू तेरे हुस्न की फिजाओं में हर तरफ।

तुम गुलशन ए बाहर शुक्रिया तुझे हम मेहरबान कहेंगे।

 

परवाह नहीं  मेरे दर्द ए दिल अपनी अदाओं हो मशगूल।

मेरे एहसासों और दर्द ए तन्हाई से तुझे हम अंजान कहेंगे।

 

है माफ तेरी हर नादानियों मैंने दिल तुझसे जो लगाया है।

गुम हूं तेरे इश्क में खुद को भारती हम गुमनाम कहेंगे।

– श्याम कुंवर भारती , बोकारो, झारखंड

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *