(शेर)- गर तुमसे कहे कोई, आवो खो जावो तुम मेरी मस्ती में।
क्या रखा है जिंदगी में, करो मौज, चाहे आग लगे बस्ती में।।
लेकिन मैं तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं रखता, बल्कि मैं चाहूँगा।
कि लोग तुम्हारी पूजा करें, करो अच्छे काम अपनी हस्ती में।।
————————————————————
हर किसी की इबादत यहाँ होती नहीं, पूजा जाता है यहाँ वही आदमी।
जीता है जो यहाँ दूसरों के लिए, और दूसरों के लिए जो मरे आदमी।।
हर किसी की इबादत यहाँ होती नहीं————-।।
यूँ तो अपने लिए ख्वाब सँजोये बहुत, और बनाया अपने लिए यह महल।
बहुत कमाई है दौलत भी अपने लिए, क्यों नहीं की है हमने ऐसी पहल।।
मिलती खुशी जिससे यहाँ सभी को, खुशी मिलना सबको है लाजिमी।
हर किसी की इबादत यहाँ होती नहीं—————।।
———————————————————
(शेर)- गर कोई खुशी कभी मिले तुमको, बांट देना खुशी यह यहाँ सबको।
मिलेगी हजारों लोगों की दुहायें, और याद करेंगे यहाँ सभी तुमको।।
———————————————————-
दो हैं राहें तेरी मंजिल के लिए, दो है मंजिल यहाँ तेरी जिंदगी के लिए।
एक सम्मान की, दूजी अपमान की, कौनसी है सही जिंदगी के लिए।।
ना किसी की करें जो बर्बादी यहाँ, पाता है यहाँ इज्जत वही आदमी।
हर किसी की इबादत यहाँ होती नहीं—————।।
———————————————————
(शेर)- कुछ कमाते हैं नाम अपना, किसी के लहू से नाम अपना लिखकर।
लेकिन शहीद कहलाता है वही, जो देता है जिंदगी अपनी कुर्बानी देकर।।
————————————————————
अपनी कहानी किसी के लहू से लिखकर, नहीं सुनाना किसी महफ़िल में जाकर।
नहीं महकाना ऐसे अपना चमन तुम, किसी के चमन से कभी फूल तुम तोड़कर।।
और शहादत उसी की लिखी जाती है, वतन पे शहीद जो होता है आदमी।
हर किसी की इबादत यहाँ होती नहीं—————-।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद ,तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)
