पिताजी तुम्हें भूल न पाऊंगा – कालिका प्रसाद

 

तुम्हारे  चरणों  की  धूलि कण,

माथे   पर  मैं  नित्य  लगाऊं,

तुम्हारे बताएं राह पर ही जाऊं,

मैं कभी  तुम्हें भूल न पाऊंगा।

 

अंगुली पकड़ कर चलना सिखाया

तुम ही मेरे जीवन में मधुमास लाएं,

तुमने ही सहनशीलता का पाठ पढ़ाया

पिताजी मैं तुम्हें कभी भूल न पाऊंगा।

 

तुमने मेरी  हर  मांग  पूरी  की है,

खुशियों की बरसात मुझ पर की,

सत्य राह पर चलने की सलाह दी,

मैं तुम्हें   कभी  भूल न  पाऊंगा।

 

तुम्हारा  निश्चल   प्यार  पाया हूं ,

तुम्हारी छत्र छाया में  बड़ा हुआ हूं ,

मर्यादा में रहने की सीख  सिखाई,

मैं  तुम्हें कभी  भूल  न   पाऊंगा।

 

चुनौतियों  से  लड़ना   सिखाया है,

भले बुरे का तुमने बोध कराया है,

हमारे लिए सुख  का त्याग  किया,

पिताजी मैं तुम्हें कभी भूल न पाऊंगा।

 

तुम मेरे लिए स्वर्ग के दरवाजे हो,

तुमने ही रिक्त हृदय में ज्ञान भरा है,

तुम्हारे अहसान मुझ पर नित्य रहेंगे,

मैं तुम्हें  कभी  भूल  न  पाऊंगा।

 

तुम  मेरे जल, थल  और नभ  हो,

तुम्हारी  शिक्षाएं  मेरे लिए वरदान है,

तुम्हारे चरणों में मैं नित्य शीश नवाऊं,

पिताजी मैं तुम्हें कभी भूल न पाऊंगा।

– कालिका प्रसाद सेमवाल

मानस सदन अपर बाजार

रुद्रप्रयाग  उत्तराखंड

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