धू धू कर के आज हर आलीशान महल क्यों जल रहा है।
दिलों दबा आवाम आक्रोश निकल कर क्यों उबल रहा है।
दोषी क्या हुक्मरानों की हुकूमत और शहंशाही अंदाज है।
तबाही को आमादा अपना ही घर युवा क्यों मचल रहा है।
गूंगी और बहरी होगी सरकार आवाम तकरार होनी तय है।
हर तरफ उठे बवाल सेना नेतृत्व नेपाल अब कुचल रहा है।
जल हुआ है खाक आग के हवाले वो संपत्ति किसकी थी।
घाटा पर्यटन रोजगार के समझ में युवा क्यों विफल रहा है।
विरोध का जरिया और हो सकता था पर तबाही तो नहीं।
शांति खुशहाली का जनाजा हर तरफ क्यों निकल रहा है।
लगेंगे कितने साल घाव भरने में भारती अंदाजा भी नहीं है।
बाबा पशुपतिनाथ नगरी शिव हृदय क्यों हो बिकल रहा है।
– श्याम कुंवर भारती , बोकारो, झारखंड
