नेता विपक्ष की विश्वसनीयता पर संकट (दृष्टिकोण)- सुधाकर आशावादी

Vivratidarpan.com – समाज में स्वयं को विश्वसनीय सिद्ध करने के लिए निश्चित मूल्यों का निरंतर अनुपालन अपेक्षित होता है, जिसके लिए गंभीरता से ईमानदारी, सदाचरण, सत्य-निष्ठा, सकारात्मक सोच, राष्ट्र के प्रति वफ़ादारी, उत्तरदायित्व का समुचित निर्वहन जैसे सकारात्मक मूल्यों पर जीवन भर अडिग रहना अनिवार्य होता है। सिर्फ राजनीति नहीं, अपितु जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बिना प्रमाण के आरोप लगाना आरोप लगाने वाले के व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्वहीन होने का परिचायक होता है। भारत चीन विवाद पर बिना प्रमाण के टिप्पणी करने वाले नेता विपक्ष को उच्चतम न्यायालय की फटकार से कुछ फर्क पड़ेगा या नहीं यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है, लेकिन सस्ती लोकप्रियता पाने के फेर में एवं अपने राजनीतिक वजूद की खोज में नेता विपक्ष नित्य ही संवैधानिक संस्थाओं तथा सत्ता पक्ष पर आरोप लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

कहना ग़लत न होगा कि कांग्रेस के दिग्गज कहे जाने वाले नेता राहुल गांधी के अधिकांश वक्तव्य केवल राजनीतिक संकीर्णता को प्रदर्शित करने वाले एवं निराधार होते हैं। देश की संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर आरोपों की सच्चाई सुनने की जगह पलायन करना उनकी आदत बन चुकी है। चाहे चुनाव आयोग हो अथवा अन्य कोई संस्था राहुल गांधी अपने किसी भी आरोप को प्रमाणित करने में असफल रहे हैं।

लोकसभा में नेता विपक्ष का यह आचरण किसी भी प्रकार से गंभीर, निष्पक्ष एवं मर्यादित नहीं कहा जा सकता । अपेक्षा की जानी चाहिए, कि माननीय उच्चतम न्यायालय की फटकार के उपरांत नेता विपक्ष को कुछ सबक अवश्य मिलेगा तथा वह बिना प्रमाण के आरोप लगाने व अफवाह फैलाने से परहेज करेंगे। (विनायक फीचर्स)

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