नीलमणि – नीलांजना गुप्ता

नाग सहेजे ज्यों मणि त्यों सहेज परिवार।
यही धरा का स्वर्ग है बाकी सब बेकार।।

त्याग, प्रेम की सम्पदा सबसे है अनमोल।
ख़ून के रिश्तों को कभी मत पैसे से तोल।।

गेह नेह के दीप से जगमग जगमग होय।
चहुदिश हो सुख शान्ती चिन्तातुर न कोय।।

मुखिया माली सा रहे सच्चा सृजनहार।
समता का सदभाव हो बढ़े बेल परिवार।।
नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश

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