नरक से भी बदतर हैं पंजाब के सिविल अस्पताल – सुभाष आनंद

vivratidarpan.com – आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले 15 दिनों से पंजाब के फिरोजपुर शहर के सिविल अस्पताल में ना पीने का पानी है और ना ही पाखानों में पानी है, जिसके कारण पाखानों में कीड़े चल रहे हैं और लोग मजबूर होकर वॉटर बॉटल का पानी प्रयोग करते हैं। वार्डों की सफाई करने वालों को 1 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है , रात्रि में दाखिल मरीजों की समस्या और बढ़ जाती है। पिछले 3 वर्षों से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और विधायक भी उन्हीं के हैं लेकिन सरकार सिविल हॉस्पिटल फिरोजपुर को कोई भी नियमित सीनियर मेडिकल अफसर नहीं दे सकी।
सूत्रों से पता चला है कि पिछले तीन महीने से किसी भी विधायक ने सिविल हॉस्पिटल का एक भी दौरा नहीं किया ना ही सिविल अस्पताल की व्यवस्था जानने की कोशिश की है। गांव शेरखा की राजवीर कौर,गांव जलेखा की निर्मल कौर, हरदयाल सिंह कंबोज और दीपक ने बताया कि सिविल हॉस्पिटल नरक के अड्डे बने हुए हैं जहां पर कोई मौलिक अधिकार नहीं है। महिला मरीजों को नित्य कर्म के लिए सखी सेंटर के पास जाना पड़ता है ,ना पीने का पानी, न दवाइयां है। हमें कई प्रकार की महंगी दवाइयां बाजार से खरीदनी पड़ती है। सिविल सर्जन ने जूनियर अधिकारियों को अस्पताल का चार्ज दे दिया है ,जिन्हें अस्पताल कार्य चलाने का कोई तजुर्बा ही नहीं है। हर काम के लिए पहले कमीशन तय होती है।
सूत्रों ने बताया कि सिविल अस्पताल में 9 से ज्यादा शौचालय हैं जिनमें से तीन पर सरकारी कर्मचारियों ने कब्जा किया हुआ है बाकी पर ताले लटके हुए हैं । पानी की सात टंकियों की स्थिति जानने की कोशिश की गई तो किसी भी टंकी के ऊपर ढक्कन नहीं है ,पानी की टंकियों के भीतर गंद, ईंटें , मरे हुए पक्षी, कबूतरों की गीदे, मिट्टी के छोटे छोटे ढेर मौजूद हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह टंकियां सालों से साफ नहीं की गई।
कर्मचारी यूनियन का कहना है कि तीन माह पहले हमने अपने खर्चे पर शौचालयों की सफाई करवाई थी। सिविल अस्पताल में पानी की सप्लाई 6 महीने से प्रभावित हो रही है। सिर्फ 15 दिन पानी की मोटर चली थी अब फिर खराब हो गई है। नशा छुड़ाओ केंद्र के अंदर जहां एल.सी.डी लगी थी अब चोरी हो चुकी है। एसी कहीं भी नहीं दिखाई देते । सूत्रों से पता चला है कि अभी तक चोरी के केस भी दर्ज नहीं करवाए गए, पानी के कूलर जो विभिन्न संस्थाओं ने दान किए थे या फिर सरकार द्वारा लगाए गए थे सभी खराब पड़े हैं। वाटर कूलर मैकेनिक से बात की तो उन्होंने बताया कि यह 12 से 15 साल पुराने हो चुके हैं। अत: इसके लिए मरम्मत की जरूरत है , मैंने प्रत्येक वाटर कूलर का एस्टीमेट बनाकर सीनियर मेडिकल अफसर को दे दिया है लेकिन इनके स्थान पर नए वाटर कूलर लगाने की सलाह दी गई है।
जब सिविल अस्पताल की साफ सफाई और पीने के पानी और सेनिटेशन की बात ड्यूटी पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल अफसर से की गई तो उन्होंने कहा कि यह हमारे दायरे में नहीं है। हमने सीनियर मेडिकल अफसर और सिविल सर्जन को पत्र लिखे हैं परंतु हमारी समस्या का कोई समाधान ही नहीं किया जा रहा। इमरजेंसी वार्ड में स्टाफ की बहुत कमी है जबकि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, स्टाफ काफी परेशान है। रात्रि को इमरजेंसी में कई बार 5 से 7 मरीजों को देखना पड़ता है। डॉक्टर ने बताया कि सिविल अस्पताल में कोई ना कोई मशीन खराब रहती है, एक्स-रे मशीन बूढी हो चुकी है ,वेंटिलेटर चलाने के लिए कोई माहिर डॉक्टरों की टीम मौजूद नहीं है, कृष्णा लेबोरेटरी के साथ पंजाब सरकार का समझौता हुआ है, वहां भी रात्रि को कोई स्टाफ नहीं होता।
इमरजेंसी टेस्टों के लिए रोगियों को बाहर शिफ्ट किया जाता है। वहीं रोगियों की पानी की समस्या को हल करने के लिए समाजसेवी शैलेंद्र से बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्रतिदिन एक टैंकर पानी का भेजा जाता है। सिविल अस्पताल में ओपीडी 600 से 700 तक पहुंच चुकी है। 175 से ज्यादा रोगी और 300 तक तीमारदार मौजूद होते हैं, सभी ठंडे पानी की डिमांड करते हैं, लेकिन हम ताजा पानी की सप्लाई कर रहे हैं। कई रोगियों को आर.ओ. जल की जरूरत है लेकिन हम अपने बजट के अनुसार लोगों को सादा पानी ही दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार पानी की टंकियों से ईंटें, पत्थर, मरे पशु पक्षी, जालों के अतिरिक्त कई और चीजें आप को मिल जाएंगी। अस्पताल की सातों टंकियों के ढक्कन गायब हो चुके हैं, ऐसा लगता है कि पिछले कई वर्षों से टंकियां की सफाई नहीं हुई है। सिविल अस्पताल की स्टाफ नर्स ने बताया कि हमारा जीवन नर्क हो चुका है ,क्योंकि कई वर्षों से टंकियों की सही ढंग से सफाई नहीं हुई। अस्पताल की टंकियां में गंदा पानी आ रहा है जो रोगियों को पिलाया जा रहा है । कुल मिलाकर सिविल हॉस्पिटल का पानी पीने योग्य नहीं है।
समाज सेवी संस्थाओं का कहना है कि यदि विधायक सिविल अस्पताल में रोगियों को मौलिक सुविधाएं नहीं दे सकता तो उन्हें विधायक पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है ,उन्हें तुरंत अपने पद से त्यागपत्र देकर भगवंत मान की सरकार से दूरी बना लेनी चाहिए। उधर लोगों का कहना है कि विधायक लोगों की दुख तकलीफों को दूर करने के लिए चुने जाते हैं , परंतु हद हो गई पिछले 15 दिनों से अस्पताल में पीने वाला पानी नहीं है परंतु विधायक बिसलेरी की बोतलों के मजे उड़ा रहे है, उन्हें शर्म नहीं आती, यदि उनमें जरा भी गैरत है तो उन्हें विधायक पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए। वहीं समाजसेवी संस्थाओं के अधिकारियों का कहना है कि डिप्टी कमिश्नर महोदय ने पिछले तीन महीने से सिविल हॉस्पिटल का टूर ही नहीं किया, न ही मरीजों की स्थिति का जायजा लिया, डिप्टी कमिश्नर आम आदमी की शिकायतों को सुनने को तैयार ही नहीं है । जिन ऑफिसरों के पास कोई अधिकार ही नहीं है वह आम लोगों की समस्याओं का समाधान कैसे कर पाएंगे? सफाई का काम ठेके पर होने के कारण सफाई कर्मचारियों को कई महीनों का वेतन ही नहीं मिल पाया। टंकियों की सफाई के लिए सफाई कर्मचारियों को लगाया गया है, लेकिन ना ही मीठा सोडा, ना ही जरूरत का अन्य सामान उपलब्ध है। (विनायक फीचर्स)

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