नन्हा चांद – अनिल भारद्वाज

झिलमिल झिलमिल तारों वाले
छोटे-छोटे रथ पर आया।
धनतेरस पर प्यारा प्यारा
नन्हा सा चंदा घर आया।

लगा दिवाली से पहले ही,
लाखों दीए जल उठे मन में।
कई फुलझड़ी और पटाखे,
लगे चमकने नील गगन में।

नन्हा मुन्ना राज दुलारा
छोटा सा इक सूरज आया।
धनतेरस पर प्यारा प्यारा
नन्हा सा चंदा घर आया।

आंखें बड़ी-बड़ी सुंदर हैं,
पंखुड़ियां से लाल अधर हैं।
उसकी बंद मुट्ठियों में
लक्ष्मी देवी के अनगिन वर हैं।

छोटी सी बंशी संग लेकर
इक छोटा सा कान्हा आया।
धनतेरस पर प्यारा प्यारा
नन्हा सा चंदा घर आया।

उसके आते ही घर-आंगन
राजमहल जैसा लगता है,
उसका गोरा मनमोहक मुख
राजकमल जैसा लगता है,

छोटा सा इक राजकुंवर
कुल दीपक बन मेरे घर आया।
धनतेरस पर प्यारा प्यारा
नन्हा सा चंदा घर आया।
– अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर

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