Vivratidarpan,com – कल्पकथा परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि हिन्दी भाषा, राष्ट्र सेवा, सनातन संस्कृति, और सद साहित्य, के सम्मान हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा रविवार दिनाँक २० अप्रैल २०२५ को अपराह्न ४.३० बजे से आयोजित १९३ वीं ऑनलाइन काव्यगोष्ठी ओजपूर्ण काव्य रचनाओं से सजी रही।
छाता, मथुरा, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार रामदेव शर्मा राही की अध्यक्षता, आशुकवि भास्कर सिंह “माणिक”, पवनेश मिश्रा, के संचालन के कार्यक्रम का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा गुरु वंदना, गणेश वंदना, एवं सरस्वती वंदना, संगीतबद्ध गायन के साथ हुआ।
अमर बलिदानियों के शौर्य, सशस्त्र सैन्य बलों के सम्मान, देश के अनूठे बिन्दुओं पर आधारित प्रश्नावली, के साथ काव्य रचनाओं के आयोजन में जम्मू कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, के कवियों ने ओज और बलिदान के भावों को शब्दों में पिरोया।
कार्यक्रम में विजय रघुनाथराव डांगे, नागपुर (महाराष्ट्र), रामसनेही ओझा , मुंबई (महाराष्ट्र), श्रीमती रानी शर्मा, बाड़ी धौलपुर, (राजस्थान) , रामदेव शर्मा “राही”, छाता मथुरा (उप्र), डॉ. रवि घायल जी, अबोहर (पंजाब), राम बहाल सिंह “बहाल कवि”, वाराणसी (उप्र), अवधेश प्रसाद मिश्र “मधुप”, वाराणसी (उप्र), श्रीमती किरण अग्रवाल, प्रतापगढ़ (उप्र), श्रीमती ज्योति राघव सिंह, चोगलमसर लेह (लद्दाख), दुर्गादत्त मिश्र “बाबा” , भोरे गोपालगंज (बिहार), भास्कर सिंह “माणिक”, कोंच जालौन (उप्र), आ. अलका शर्मा, जम्मू (जम्मू कश्मीर) भगवानदास शर्मा “प्रशांत”, इटावा (उप्र), डॉ श्रीमती मंजू शकुन खरे, दतिया (मप्र), दीदी श्रीमती राधा शर्मा, पवनेश मिश्रा ने काव्य पाठ किया।
सर्वधर्म सम्मान एवं सनातनी धार्मिक चिन्हों की अनुशंसा की प्रेरणा के साथ अध्यक्षीय उद्बोधन में रामदेव राही जी ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए रचनाकारों को छंदबद्ध रचनाओं को सृजित करने पर प्रोत्साहित किया। अंत में दीदी श्रीमती राधा शर्मा ने “सर्वे भवन्तु सुखिन:” शान्ति पाठ के साथ के साथ सभी का आभार व्यक्त किया।
कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने कल्पकथा परिवार को उत्कृष्ट आयोजन हेतु बधाई दी है।
