( 1 ) ” त्रि “, त्रिलोकी
ज्ञाता हैं नारदजी
ईश्वर के परम भक्त..,
और पुत्र कहलाए श्रीब्रह्माजी के !!
( 2 ) ” लो “, लोक
तीनों में भ्रमण कर
ज्ञान का प्रसार करते..,
और सभी शंकाओं का समाधान करें !!
( 3 )” क “, कलहप्रिय
देवर्षि हैं न्यारे
सभी के दुलारे…,
और वीणा बजा मन का हाल जानते !!
( 4 )” त्रिलोक “, त्रिलोक
में विचरण कर
श्रीविष्णुभक्त नारदजी चलें..,
देवों का संदेश प्रसारित करते !!
( 5 )” त्रिलोकवासी “, नारदजी
श्रीनारायण-नारायण जपते
चलें प्रेम आनंदधन बाँटते…,
सभी का मार्ग प्रशस्त करते !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
