तैयारी जीत की – अशोक यादव

नया साल बड़े ही धूमधाम से मनाना है।

कुछ पाने के लिए, कुछ कर दिखाना है।।

जीत होगी या हार होगी, मत सोचो तुम,

हर हाल में मंजिल के शिखर तक जाना है।।

 

जब तक साँसे चल रही है, तुझमें भी है दम।

कई बाधाएँ आएँगी, रुक मत, बढ़ा कदम।।

गिरकर फिर उठ, संभाल अपने आप को,

आँधी और तूफान बन, वज्र का बना बदन।।

 

छद्मरूप त्याग कर, भाग्य का लिखा बदल।

नये ज्ञान-विज्ञान से, जीवन में ला हलचल।।

असंभव को संभव कर, तू कुछ बन सकता है,

विद्या प्रकाश पुस्तक में ध्यान लगा हर-पल।।

 

अंतर्मन की ज्वालामुखी को, ज्ञान से धधका।

अपने आप को लक्ष्य से कभी भी मत भटका।।

तू है धुरंधर, अंधाधुंध कर परीक्षा की तैयारी,

अंतिम में मिलेगी कामयाबी, कर्म में मन लगा।।

– अशोक कुमार यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़

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