( 1 ) तुम
मिलो तो सही,
दिल से कहें….,
सुनें जानें बातें अनकही !!
( 2 ) तुम
झुको तो सही,
छुएं उत्तुँग शिखर…,
आसमां पे चढ़के यहीं !!
( 3 ) तुम
बहो तो सही,
कल-कल करते…,
मिलें सागर से कभी !!
( 4 ) तुम
चलो तो सही,
मंज़िलें आएंगी ख़ुद-ब-ख़ुद..,
चलकर तुम तक यहीं !!
( 5 ) तुम
खिलो तो सही,
फूलों की तरह…,
भंवरे आएंगे गुनगुनाते यहीं !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
