( 1 )” तुम्हारे “, तुम्हारे
बगैर है,
जिंदगी अधूरी मेरी !
तुम हो तो, है ये खूबसूरत…,
वरना है ये, सूनी-सूनी कोरी !!
( 2 )” बिना “, बिना
तुम्हारे है,
बगिया बंजर मेरी !
तुमसे ही खिलें, फूल चमन में….,
वरना जिंदगी में, कहाँ रोनक मेरी !!
( 3 )” जिंदगी “, जिंदगी
अधूरी है,
रंगहीन तस्वीर मेरी !
तुमने आके भरे, स्वप्निल रंग इसमें..,
वरना बेनूर थी, ये जिंदगी मेरी !!
( 4 )” अधूरी “, अधूरी
जिंदगी में,
सजायी ख्वाहिशें तुमने !
तुमने ही आकर बदली जीवन दिशाएं.,
संग-साथ चलीं जमाए महफिलें हमारी !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
