तुम्हारी यादों की खुश्बू – कालिका प्रसाद सेमवाल

 

तुम्हारी यादों की खुशबू ,
जब भी दिल को छूती है।

आभा लिए हुए है सौरमंडल-में,
चाँद-सा चेहरा तुम्हारा चमकता है।

महकती है तन की डाली-डाली,
कोयल-सी राग सुनाती मुझको।

सच में कितनी तुम मनमोहिनी हो,
मखमली आवाज कानों में गुंजती है।

सुनकर सुध-बुध में खो जाता हूं,
जब तुम्हारी यादें दिल को पिरोती हैं।

वीरान जंगल-सा लगता है,
जब साँसें तुममें खो जाती हैं।

सिर्फ तुम्हारी यादों में खोया हूं,
तन्हा -तन्हा और उदासी है।

धरा और अंबर है अनूठे,
पंखुड़ी तुझ पर दिल की होती है।
– कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार , रुद्रप्रयाग

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