सइयां दिल लुट गए दर्द मैं सुनाती रही।
जाम इश्क छलकाने लगें मै पिलाती रही।
सइया दिल लुट गए………….।
वैरी सावन रिमझिम बरसे बदन अगन जलाए।
रूठे पिया को मैं मनाती रही,
सइया दिल लुट गए………..।
प्रीत की रीत मैं न जानू पिया के प्रेम में मर जाऊं।
दिल लगा के उनसे प्यार मैं लुटाती रही।
सइयां दिल लुट गए……………।
गरज गरज बरसे बादल दिल में तूफान उठाए।
दिल के दर्पण पिया मूरत मैं निहारती रही।
सइयां दिल लुट गए………….।
अब के सावन मै न मानूंगी दूर पिया को जाने न दूंगी।
नैन में उनको मै बसाती रही।
सइयां दिल लुट गए………..।
भारती पिया बड़े भोले जाने न मेरे दिल की बतिया ।
दिल का राज उनको मै समझाती रही।
सईयां दिल लुट गए मै दर्द सुनाती रही।
– श्याम कुंवर भारती , बोकारो,झारखंड
