जो भी हुआ, अच्छा हुआ – गुरुदीन वर्मा

जो भी हुआ, अच्छा हुआ, तुमसे या मुझसे या जग से हुआ।

अब याद उसको तुम मत दिलाओ, कल जो हमारे संग हुआ।।

जो भी हुआ, अच्छा हुआ,———————।।

 

अच्छा जो मुझको कल को लगा, कर दिखाया मैंने वह।

तुमको बुरा जो कल को लगा, कर दिखाया तुमने वह।।

ज्यादा नहीं हो बदनाम अब हम, अब भूल जावो कल जो हुआ।

जो भी हुआ, अच्छा हुआ,——————–।।

 

है कौन ऐसा यहाँ आदमी, जिसने कभी पाप किया नहीं।

अपनी खुशी के लिए यहाँ, जिसने कभी स्वार्थ किया नहीं।।

करते हैं छुपकर जो काम लोग, बस हमसे वह बेपरदा हुआ।

जो भी हुआ, अच्छा हुआ,——————-।।

 

मरते के संग कोई मरता नहीं है, कर्मों के फल ही पाते हैं सब।

मत ध्यान जग की बातों पे दो, विश्वास किसी का नहीं है अब।।

अपना नसीब अपने हाथ है, बर्बाद यहाँ  कौन किससे हुआ।

जो भी हुआ, अच्छा हुआ,——————–।।

– गुरुदीन वर्मा आज़ाद

तहसील एवं जिला- बारां (राजस्थान)

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