जो तुम हो – रश्मि मृदुलिका

 

नयन तेरे दिनकर किरण बनकर,

बिखर गए कुम्लाहे मुख पर मेरे,

किसलय सी गात खिल उठी,

चहक उठे स्वास रंध्र बांसुरी बने,

मृत्यु झील से खींच लाये,

शब्द तेरे पतवार बन गए,

बोझिल दिन- रात सरस हुए,

प्रीत तारा पुंज से उजास बने,

प्रीत की सौगात प्रिय तुम मेरे,

रहना सदा ही संग मेरे,

संंताप द्वार से लौट गई,

जीवन समर तुम संग ही जीते,

– रश्मि मृदुलिका, देहरादून , उत्तराखंड

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