जय मा दुर्गा – कालिका प्रसाद सेमवाल

 

नौ दिन में माता मेरी

नौ रुप धारण करती,

भक्ति भाव सनातनी के

दिल  में मा  जगाती है।

 

कभी शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी बन

कभी चंद्रघंटा मा बन जाती  है,

कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी बन

इस जीवन की रक्षा मा दुर्गा करती है।

 

कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री

इस  जीवन में रंग दिखलाती है,

देकर  नित  नये   वरदान

अभिलाषा मा पूरी कर देती है।

 

सिंह सवारी कर माता

सज-धज कर आती है,

भक्तों को  सुख  पाकर

मा दुर्गा  मुस्काती  है।

 

नवरात्रों में  माता आकर

सुख सम्पदा हम पर बरसाती,

आपस में रहे हम मैत्री भाव से

माता रानी हमें सिखलाती है।

 

दुर्गुणों का  संघार  करती

जीवन सुखमय मा बनाती है,

भक्तों के सम्मुख माता रानी

जीवन को अमृत जैसा बनाती है।

 

घर आंगन के वातावरण  को

खुशहाली  से भर  देती   है,

मा दुर्गा के नौ रूपों को देखकर

हम सब नतमस्तक हो जाते हैं।

– कालिका प्रसाद सेमवाल

मानस सदन अपर बाजार

रुद्रप्रयाग उत्तराखंड

 

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