माँ दुर्गा की वंदना, कर लो आठों याम।
सहज सरल मन मोहिनी, पावन माँ का धाम।
भक्ति भाव से ही मिले, दुर्गा माँ का प्यार।
जन्म जन्म का पुण्य है, माता के दरबार।।
माता के दरबार में, आता है आनंद।
बाँधे हैं सम्बंध माँ, यह अद्भुत शुभ छंद।।
ममता का गागर माँ, दे दो आशीर्वाद।
माता जननी पूज्य हैं,वाणी में हैं नाद ।।
माता के नौ रूप हैं,आओ माँ के द्वार।
भक्तों की हैं प्रार्थना,गीतों का है सार।।
भावों में दोहा रचा, माँ देती संस्कार।
शब्दों की नव वीथिका, बनें यही आधार।
घट-घट माँ का वास है, दृढ़ श्रद्धा विश्वास।
पूजे सारी सृष्टि ही, माता रहती पास।
-कविता बिष्ट ‘नेह’, देहरादून, उत्तराखंड
(अध्यक्ष :जीवन्ती देवभूमि साहित्यिक एवं
सामाजिक राष्ट्रीय संस्था देहरादून उत्तराखंड)
