जटा गंगधार बहे अर्द्ध चंद्र शीश सजे,
चर्म वस्त्र अंग सोहें मस्तक विशाल है।
आभूषण बिच्छू-सर्प, हर लिया सर्व दर्प,
नाग का कंकण हाथ लगता कमाल है।
शिव शंभु त्रिपुरारी बैल की करें सवारी,
त्रिशूल धारी प्रभु ने जीत लिया काल है।
माता गौरी सोहें वाम मन से करें प्रणाम,
द्वार पे विराजमान नंदी द्वारपाल है।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
