जब कभी देखोगे तुम खत ये – गुरुदीन वर्मा

जब कभी देखोगे तुम खत ये, हैरानी तुमको बहुत तब होगी।

जब कभी सुनोगे तुम गीत ये, परेशानी तुमको बहुत तब होगी।।

जब कभी देखोगे तुम खत ये—————–।।

 

कितना तुम्हें चाहा है हमने, कितनी खुशी हमने तुमको दी है।

हमने रखा ख्याल हमेशा तेरा, इज्जत तुम्हें इतनी हमने दी है।।

तुमने मगर कभी समझे नहीं है, जज्बाते-दिलो-गम हमारे।

जब कभी देखोगे तुम दर्द ये, मोहब्बत हमसे बहुत तुम्हें तब होगी।।

जब कभी देखोगे तुम खत ये——————।।

 

किसी की चाहत तुम्हें नहीं होगी, तुमको मिलेगी इनसे वफ़ा इतनी।

बहुत हसीन होगी तुम्हारी जिंदगी, तुमको मिलेगी इनसे दुहा इतनी।।

हो गया कैसे हमको तुमसे प्यार, खुशनसीबी इसे तुम अपनी मानो।

जब कभी पढ़ोगे तुम गीत ये, हमारी तलाश बहुत तुम्हें तब होगी।

जब कभी देखोगे तुम खत ये——————-।।

 

याद करोगे तुम यह मुलाकात, आयेगी याद तुमको प्रीत यह हमारी।

कोई वफ़ा इतनी नहीं कर सकेगा, की है हमने खिदमत जितनी तुम्हारी।।

मुश्किल होगा हमारे बिन जीना तुमको, बीतेगी मुश्किल में रातें तुम्हारी।

जब कभी लिखोगे तुम दर्दे-दिल कोई, आँखों में तस्वीर हमारी तब होगी।।

जब कभी देखोगे तुम खत ये———————।।

– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद, तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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