अयोध्या आए राम राजा संग सीता महारानी।
हर्षित अयोध्या करे स्वागत विश्वामित्र गुरु ज्ञानी ।
है तैयारी राज तिलक लक्ष्मण शत्रुघ्न भरत भ्राता।
जगमग है जोत दिवाली घर घर सब ओर सुहाता।
बीता काल विघ्न सब ओर राम राज्य है आया।
दूर हुए दुख दुर्भिक्ष राज मुकुट राम है सुहाया ।
घर आंगन अयोध्या सुंदर स्वक्ष है बड़ा शोभित।
देखी देखी शोभा नगर हर का मन है मोहित ।
हनुमान गढ़ी में बिराजे भक्त राम बीर बजरंगी।
बने है द्वारपाल अनंतकाल कपि राम के संगी।
असत्य अधर्म पर जीत सुत दशरथ महाभागी।
मनी है दिवाली अयोध्या हुलसित भरत बैरागी।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड
