छुट्टी आई, चलो खेलें,
मिट्टी में घर-घर बनाएं।
कागज़ की कश्ती बनाकर,
बारिश में उसे तैराएं।
सूरज की किरणें मुस्काएं,
पंछी भी गाएं गीत प्यारे।
दोस्तों संग हँसी-खुशी,
बचपन हो रंगीन प्यारे।
झूला झूलें, चिड़िया देखें,
खुशियों की हो बौछार।
छुट्टी का ये प्यारा दिन,
लाए सबके लिए उपहार।
– डॉ सत्यवान सौरभ, 333, परी वाटिका,
कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी)
भिवानी, हरियाणा – 127045,
