बापू तेरे बंदरों की ,जांच पड़ताल करी ,
अंधे वाला जज बना न्याय न दिला सका।
चुप रहने वाला जिला,अधिकारी बन गया ,
शिक्षा और स्वास्थ की दवाई न पिला सका ।।
तीसरे वाले ने देखा , सुना और बोला नहीं ,
जनता की चीख में आवाज न मिला सका ।
बंदरों को छोड़ बापू , गधे के भरोसे रहे ,
संघ वाला किला तेरा गधा न हिला सका ।।
– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून
