छंद छटा (बेटियां) – जसवीर सिंह हलधर

रूढ़ियों की बेड़ियों को, तोड़ ताड़ आगे बढ़ीं,
सरहदों पे टैंक भी चलाने लगीं बेटियां ।

कार, बस, ट्रेन की तो, छोटी मोटी बात अब,
चांद और मंगल पे जाने लगीं बेटियां ।।

युद्ध के समय ये, रण चंडी बन नाचतीं हैं,
तेजस रफाल को उड़ाने लगीं बेटियां ।

बेटों से नहीं हैं कम, छोड़ो रूढ़िवादी भ्रम,
खेलों में भी विश्व कप, लाने लगीं बेटियां ।।
– जसवीर सिंह हलधर, देहरादून

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