( 1 ) मिलो कभी तो
चाय पे,
बुनेगें हम फिर किस्से !
मिलकर साथ चहकते हुए…,
सुनें एकदूजे को खामोशी से !!
( 2 ) बुलाओ कभी तो
घर पे,
कुछ सुनाएं कथा-व्यथाएं !
मिले बरस हमें हुए..,
खूब लगा ठहाका कहाँ मुस्कुराए !!
( 3 ) चलो कभी तो
लौट चलें,
यादें बचपन की गुनगुनालें !
इसी बहाने हर्षाते हुए…..,
गर्म कहवे को पीते चलें !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
