चंद पंक्ति – सविता सिंह मीरा

हम पे क़ातिल निगाह जब उट्ठी,

रख दिया हमने ज़ेर-ए -ख़ंजर दिल।

तुमको हम पर तरस नहीं आता,

ऐ सनम कितने तुम हो पत्थर दिल।

” *मीरा* ” कैसे ना अब ग़ज़ल लिक्खे,

बन चुका मेरा भी सुख़नवर दिल।

सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर  ,

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