इंद्र पूजा बंद भई, चहुँदिशि वर्षा हुई
खेल में गिरिराज को, कनिष्ठा पे उठा लिया
गोवर्धन छाता तना, गिरि प्राण दाता बना
सातवें दिन से वहाँ, अन्नकूट शुरू किया।
लीला करें लीलाधारी, दुख हरें बनवारी
देवराज का अभिमान, धूल में मिला दिया।
गो जीवन का आधार, पूजता सारा संसार
प्राणों के पोषण हेतु, दूध को सबने पिया।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
