जिंदगी नहीं है खेल जरा सोच समझ के खेल।
सोचो ना जिंदगी है जेल जरा सोच समझ के खेल।
करोगे गर कोई चूक लग जाएगी हुक।
सावधानी हटी दुर्घटना घटी जरा गौर से लुक।
बिक जाएगा बिन मोल लगी है देखो सेल।
जरा सोच समझ के खेल।
जिंदगी नहीं है खेल जरा सोच समझ के खेल।
समय और मौका मिलता नहीं है बार बार।
गवां न देना इसको खुद पर कर लो जरा ऐतबार।
क्या मालूम सिक्का जिंदगी का होगा पट ओर टेल।
जरा सोच समझ के खेल।
जिंदगी नहीं है खेल जरा सोच समझ के खेल।
सोचा है तूने कभी क्यों तू आया है यहां।
गंवाया समय तूने या कुछ पाया है जहां।
जिंदगी में जीता या हो गया है तू फेल।
जरा सोच समझ के खेल।
जिंदगी नहीं है खेल जरा सोच समझ के खेल।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, ,झारखंड, मॉब.9955509286
