गीतिक – मधु शुक्ला

 

प्रेम से मीत ने जो पुकारा,

हर्ष ने जिंदगी को दुलारा।

 

रूठतीं स्वार्थ से भावनाएं,

प्रेम सद्भाव को ही निहारा।

 

माँग संबंध की स्वच्छता है,

ये न हो तो न होता गुजारा।

 

भक्त संसार में हैं खुशी के ,

किन्तु मैं से लुटे स्वप्न प्यारा।

 

दान देना नहीं जानते जो,

प्राप्त कैसे करेंगे सितारा।

— मधु शुक्ला,सतना,मध्यप्रदेश

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