प्रेम से मीत ने जो पुकारा,
हर्ष ने जिंदगी को दुलारा।
रूठतीं स्वार्थ से भावनाएं,
प्रेम सद्भाव को ही निहारा।
माँग संबंध की स्वच्छता है,
ये न हो तो न होता गुजारा।
भक्त संसार में हैं खुशी के ,
किन्तु मैं से लुटे स्वप्न प्यारा।
दान देना नहीं जानते जो,
प्राप्त कैसे करेंगे सितारा।
— मधु शुक्ला,सतना,मध्यप्रदेश
