प्रबल विरोधी, हों जब अपने ,
तय तब होते , कंटक मिलने।
कठिन परीक्षा, जीवन लगता,
जब लग जाते , रक्षक डसने।
नरक हमारा , जीवन बनता,
गृह जब आते , हैं छल गहने।
विमल विचारों, के उपवन में,
कुसुम लगे हैं, कृत्रिम दिखने।
मनन करें क्यों, व्याकुल उर हैं,
हृदय लगे क्यों, तेज धड़कने।
— मधु शुक्ला, सतना, मध्यप्रदेश
