गीतिका – मधु शुक्ला

 

रिवाजों से शिकायत का चलन जग में पुराना है,

बुजुर्गों की इसी तकनीक से मौसम सुहाना है।

 

सुखी परिवार का आधार ममता,एकता होती,

इसी सच के वरण द्वारा सुरक्षा प्रेम पाना है।

 

भयंकर भय हुआ पैदा सदन की रीढ़ धँसने का,

रखें दोनों सिरे मजबूत यदि गृह रथ चलाना है।

 

बढ़ाकर स्वार्थ से अनुराग हमने प्रेम को खोया,

वफा से ही वफा मिलती नहीं दोषी जमाना है।

 

तुला संबंध की रखना हमेशा संतुलित मित्रो,

गहो यह बात जग में यदि सुखद जीवन बिताना है।

— मधु शुक्ला, सतना, मध्यप्रदेश

 

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