ग़ज़ल – रीता गुलाटी

 

वफा से करे काम उसको निभाएंँ,

करे नेकियाँ जो जग भी सराएँ।

 

खुदा की इनायत हँसे मुस्कुराएँ,

तुम्हारे  लिये है हजारो दुआएँ।

 

मिले आज हमको दो ल़ख़ते-जिगर हैं,

सलामत रहे नाम जग मे कमाएँ।

 

खिला है चमन यार दिल मे तुम्हारे,

मिलेगी खुशी तुमको देते दुआएँ।

 

मिले आज मुझको ल़कव-ए-सुखन भी,

बहुत की है मेहनत, सभी को बताएँ।

 

कहाँ जा रही है हया अब हमारी,

दगा सबको देते, छुपाते निगाहें।

 

हुआ आज जीना भी मुश्किल बड़ा है,

बड़ी उलझने हैं ये किसको बताएँ।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़

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