बाँध बैठे सर कफन वीरो की टोली एक दिन,
फिर खुशी से मौत उनको है चूमती एक दिन।
कर रही है आज राधा,श्याम का इंतज़ार भी,
श्याम के दर्शन भी होगे,मान लेगी एक दिन।
कौन किसका साथ देता,छूट जाते लोग क्यो?
जिंदगी जीनी पढेगी फिर अकेली एक दिन।
सेज पर बैठी है गोरी, राह देखे प्यार की,
जान लो ये बेबसी भी जान लेगी एक दिन।
अब हुई हूँ मैं अकेली,रास्ता देखूँ तेरा,
बिन तुम्हारे खार सी,कैसे कटेगी एक दिन।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
