प्यार के फूल दिन रात खिलते रहे।
दूर रहकर हमे हाय छलते रहे।
दूर था यार हमसे भले आज भी
यार से हाय ऩज़रे मिलाते रहे।
चाँदनी चुनरी ओढ़े सितारों भरी।
चाँदनी चाँद मिलते उजाले रहे।
जिंदगी प्यार के गीत गाने लगी।
हमसफर संग सपने सजाते रहे।
रात दिन ख्याब मे उनको देखा करूँ।
ख्याब देखे थे जितने अधूरे रहे।गिरह
भूल गम को तू जी हौसलों को लिये।
मुफलिसी मे सभी तिलमिलाते रहे।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
