यार मेरी खता को भुला दीजिए।
साथ देकर हमेशा दुआ दीजिए।
है छुपा दिल मे जो,वो बता दीजिए।
राज दिल के सभी को दिखा दीजिए।
नाम तेरा लबो पे सजाते रहे।
भूलकर हर खता मुस्कुरा दीजिए।
चाँदनी चुनरी ओढे सितारों भरी।
चाँद चाहे उसे तुम बुला दीजिए।
दर्द तूने हमे यार क्यो सोंपे थे।
ख्याब देखें उन्हें तुम भुला दीजिए।
जिंदगी प्यार के गीत गाने लगी।
ढूँढती हमसफर को मिला दीजिए।
कब से आतुर है हम मयकदा के लिये।
जाम नजरों के हमको पिला दीजिए।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
