लिखें प्यार के खत हमें भी बता दें,
लिखी शायरी हो वही गुनगुना दें।
नही अब किसी को कभी भी दगा दें,
मिटाकर दरारें खुशी को बढ़ा दें।
मिले जिंदगी मे भले मुश्किलें भी,
मुहब्बत करे,खुश रहे,मुस्कुरा दें।
करूँ प्रार्थना मैं तो अपने खुदा से,
मिले यार मेरा खुदा तू मिला दें।
छुपे गम बड़ें हैं ऩजर वो न आते,
मिले सब को खुशियाँ खुदा तू शफा दें।
हुई आज हलचल पिया क्यो खफा है।
करेंगे वफा हम जरा मुस्कुरा दें।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
