काश औलाद शान हो जाए।
घर सभी बागबान हो जाए।
आज खुशियां मिली बहाने से।
आपको प्यार जान हो जाए।
प्यार बेटी को तुम सदा करना।
घर मे बेटी का मान हो जाए।
इश्क तेरा जो याद आता है।
पास बैठो निगहबान हो जाए।
चाँद अपना तुम्हें बना लूँ अब।
तू मेरा आसमान हो जाए।
साथ मिलकर रहे हमेशा हम।
अब सुखद खानदान हो जाए।
छा गये नभ मे अब घने बादल।
काश वो मेहरबान हो जाए।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
