बन मसीहा वो बचायेगा कभी।
रास्ते हमको दिखाएगा कभी।
जिंदगी होगी बड़ी खुशहाल अब।
देखना वो दिन भी आयेगा कभी।
हम़ बनेगे शायरा काबिल़ बड़ी।
जग मे मेरा नाम़ चम़केगा कभी।
नूर तेरा आँख मे मेरे बसा।
दूर रहना बस रूलायेगा कभी।
आज तड़पे है तुम्हारी याद मे।
गीत खुशियों के दिल गायेगा कभी।
अब सजी है ये धरा फूलों से है।
रूप उसका मन को भायेगा कभी।
बंदगी मालिक की*ऋतु कर लेना तुम।
मुश्किलों को वो हटायेगा कभी।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
