इस दिल की धड़कनो मे बसा प्यार आपका,
खुशियां मिले सदा ,रहे इख्लास आपका।
करते रहे फर्याद खुदा से भी हम सदा,
छूटे न जिंदगी से ये दरबार आपका।
हमकों मिली है आपसे खुशियों की रहमतें,
भूलूँ नही कभी भी ये उपकार आपका।
बैठी हूँ आज दर पे बड़ी आस माँ लिये,
पूरी करेगी आस हूँ परिवार आपका।
बेटे भी कम नही है हमेशा दुलार दो,
करता रहे सदा ही वो सत्कार आपका।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
