ग़ज़ल – रीता गुलाटी

 

जो करे गद्दारी उसे धिक्कार कर,

अब उठा हथियार दुशमन वार कर।

 

लिख कसीदे याद मे जो मर गये,

जो मिटे है देश पर पुचकार कर।

 

देश के दुशमन बने उनको कुचल,

सर कलम को तेज तू औज़ार कर।

 

मात देगी आज मेरी अब कल़म,

तेज अपनी तू कल़म की धार कर।

 

जिंदगी भी आज प्यारी बस लगी,

प्रेम की तू हर तरफ झंकार कर।

 

जंग को अब जीत कर घर आ गये,

फिर मना खुशियाँ वतन सब वार कर।

 

जिंदगी खुशहाल अपनी तू बना,

भूलकर सारे गमों को प्यार कर।

– रीता गुलाटी..ऋतंभरा, चण्डीगढ़

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