हँसते हँसते जान देना देखना,
इश्क मे सब कुछ लुटाना देखना।
मुस्कुराकर खिलखिलाना देखना,
प्रेम बाँटे प्रेम पाना देखना।
जिंदगी मे सब लुटाना देखना,
जान देगे, आजमाना देखना।
अब कहर ढाती रही उल्फत तेरी,
क्यो गये अब छोड़ जाना देखना।
तुम हकीकत को छिपाना देखना,
जिंदगी का तुम बहाना देखना।
इश्क मे पागल हुए हैं यार क्यो?
जिंदगी का डगमगाना देखना।
जो छुपाया है निखालिश आपने,
प्रीत का सच्चा खजाना देखना।
अलविदा हमने किया यादो को अब,
याद से तेरा ही जाना देखना।
उम्र भर जिसको था खोजा रात दिन,
छोड़कर मुझको न जाना,देखना।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
