जे भी डुबल उ पावल पौरे वाला का पाई।
जे गावल उ भावल रोवे वाला का पाई।
आवे जे दुनिया में लड़े के पड़ेला जीनगी से।
जे लड़ल ते टिकल भागे वाला कहा पाई।
दरिया ए इश्क पार कहा पावेला सब केहू।
जे दिल दिहल ऊ लिहल सोचे वाला कहा पाई।
सबके मिलीहे भगवान ई साँच होला ना कबों ।
जे भाव भरल ऊ लूटल जापे वाला कहा पाई।
भरल भारती बा खजाना सब ई दुनिया में ।
जे खोजल उ समेटल सुते वाला कहा पाई।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर), बोकारो, झारखंड
