ग़ज़ल (भोजपुरी) – श्याम कुंवर भारती

जे भी डुबल उ पावल पौरे वाला का पाई।

जे गावल उ भावल रोवे वाला का पाई।

 

आवे जे दुनिया में लड़े के पड़ेला जीनगी से।

जे लड़ल ते टिकल भागे वाला कहा पाई।

 

दरिया ए इश्क पार कहा पावेला सब केहू।

जे दिल दिहल ऊ लिहल सोचे वाला कहा पाई।

 

सबके मिलीहे भगवान ई साँच होला ना कबों ।

जे भाव भरल ऊ लूटल जापे वाला कहा पाई।

 

भरल भारती बा खजाना सब ई दुनिया में ।

जे खोजल उ समेटल सुते वाला कहा पाई।

– श्याम कुंवर भारती (राजभर), बोकारो, झारखंड

 

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